हर्ष और व्यास जाती के बिच ये डोलची मार खेल (पढ़े पूरी खबर)

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होली परम्परागत खेल

बीकानेर, (बीकानेर दर्पण न्यूज)। होली के इस पावन मोके पर फाल्गुन सुदी 12 को हर्ष और व्यास जाती के बिच ये डोलची मार खेल हर्षो की ढाल पर खेला जाता है, जो पिछले कई समय से चलता आ रहा है
इस खेल में हर्ष-व्यास जाती को लेकर बहुत से परम्परागत नियम को बनाये गये है जो आज के युवा बी फॉलो कर रहे है ।
आज तक हमारे हर्ष और व्यास जाती पूर्वजो ने इसे निभाया है उन्ही की पंथ संचलन पर चलते रहते हुवे आज के हर्ष और व्यास जाती के युवा  इसे और बेहतर एंव सभ्यता से एक नया रूप दे। 

bikaner holi
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ये फ़ोटो में आप देख रहे हो इसे ही डोलची कहते है ये गोपाल जी पिछले कई समय से बनाते आ रहे है इसे बनाने में कम से कम 10-15 दिन लगते है ये चमडे और सूत के दागे से बनाई जाती है इसका हथा लकड़ी का होता है ये पूरी बन जाने के बाद कुछ समय के लिए धुप में रखी जाती है जिससे की इसमें मजबूती आती है लकड़ी के हथे में 3 अंगुली और ऊपर वाले हिस्से में अंगूठे से पकड़कर पानी भरकर एक दूसरे की पीठ पर वार किया जाता है ।इस वार को लड़ाई या झगड़े का नाम ना देकर प्रेम और प्यार का प्रतीक बताया गया है ।निरन्तर इसी प्रकार से ही आपसी प्रेम और भाईचारा बना रहे है ये ही ‘गोपाल लाल प्यारे’ से और ‘अमरेश्वर महादेव’ से अरदासना पर विनती करते है।


यादवेन्द्र व्यास बबलू

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