यूनिवर्सिटी इलेक्शन के रिजल्ट आते ही, कही यूं दिखी बदतमीजी तो कहीं खौफ

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उदयपुर। सुविवि में अध्यक्ष पद पर दिनभर नाटकीय अंदाज में काउंटिंग चलती रही। दोपहर 2 बजे शुरू हुई काउंटिंग के रुझानों में शाम 6 बजे तक रौनक गर्ग आगे चल रहे थे। काउंटिंग के दौरान शुरूआती वोट ज्यादातर रौनक को पड़े थे। ऐसे में शाम 6 बजे तक रौनक 600 वोट से आगे थे। मगर इसके बाद कहानी में नाटकीय मोड़ आया और भवानी आगे बढ़ते रहे। शाम 7.30 बजे भवानी की जीत तय हुई। मगर विरोधी प्रत्याशी ही आपत्ति के चलते दोबारा रिकाउंटिंग कराई गई और 7252 वोट दोबारा गिने गए। आखिरकार रात 8.45 बजे भवानी की जीत की औपचारिक घोषणा की गई।

लॉयन न्यूज,उदयपुर। सुविवि में अध्यक्ष पद पर दिनभर नाटकीय अंदाज में काउंटिंग चलती रही। दोपहर 2 बजे शुरू हुई काउंटिंग के रुझानों में शाम 6 बजे तक रौनक गर्ग आगे चल रहे थे। काउंटिंग के दौरान शुरूआती वोट ज्यादातर रौनक को पड़े थे। ऐसे में शाम 6 बजे तक रौनक 600 वोट से आगे थे। मगर इसके बाद कहानी में नाटकीय मोड़ आया और भवानी आगे बढ़ते रहे। शाम 7.30 बजे भवानी की जीत तय हुई। मगर विरोधी प्रत्याशी ही आपत्ति के चलते दोबारा रिकाउंटिंग कराई गई और 7252 वोट दोबारा गिने गए। आखिरकार रात 8.45 बजे भवानी की जीत की औपचारिक घोषणा की गई।

एक साल बाद फिर एबीवीपी की वापसी
सुविवि के केंद्रीय अध्यक्ष पद पर एबीवीपी ने एक साल बाद वापस से कब्जा कर लिया है। 2015 में एबीवीपी के सोनु अहारी निर्विरोध अध्यक्ष बने थे। लेकिन 2016 में निर्दलीय मयूरध्वज ने एबीवीपी और एनएसयूआई के प्रत्याशियों को धूल चटा दी थी।

भवानी बोले-मयूर ने दिलाई जीत
सुविवि अध्यक्ष पद पर जीत के बाद भवानी ने कहा कि मयूरध्वज के समर्थन और वर्षभर कॉमर्स कॉलेज में किए कामों का परिणाम यह जीत रही। वहीं लवपाल सिंह का भी समर्थन रहा। नामांकन के दौरान जो गलती हुई थी वो नहीं दोहरानी थी और नियमों का पालन करना था इसलिए जीत के बाद कोई रैली नहीं निकाली। ना ही किसी किस्म का हंगामा किया।

भवानी शंकर बोरीवाल इसलिए जीते
छवि से फायदा छात्रों के बीच भवानी शंकर बोरिवाल की छवि साफ-सुथरी है। भवानी का नाम कभी भी किसी विवाद में नहीं आया। ना ही उनपर अन्य छात्रनेताओं की तरह कोई आपराधिक मुकदमा है। मयूरध्वज से मिला समर्थन कॉमर्स कॉलेज में मयूरध्वज के गुट को सबसे मजबूत माना जाता है। भवानी को इसका फायदा मिला। वहीं एबीवीपी के पास कोई उम्मीदवार नहीं होने से असंतोष जैसी बात नहीं थी। सभी कार्यकर्ताओं ने भवानी को जिताने के लिए समर्थन दिया। भवानी आर्थिक रूप से निम्न परिवार से आते हैं और उनके पिता टेम्पो चालक हैं। भवानी के घर पर बनाया एक वीडियो भी वायरल करवाया गया था, जिससे छात्रों में सहानुभूति हुई।

रौनक गर्ग इसलिए हारे
आपराधिक छवि – रौनक गर्ग लड़ाई-झगड़े को लेकर आपराधिक मामला झेल रहे हैं। रौनक कुछ हफ्ते जेल भी काट कर आया है। छात्रों के बीच ऐसी छवि से उन्हें नुकसान हुआ। मयूरध्वज से की दुश्मनी – रौनक 2014-15 में कॉमर्स कॉलेज के अध्यक्ष रहे। वे मयूरध्वज गुट के थे, लेकिन कुछ महीने पहले टिकट के विवाद को लेकर अलग हो गए और मयूरध्वज के समर्थकों से झगड़ा भी हुआ। जातिगत समीकरण फेल – रौनक माहेश्वरी जैन समुदाय से आते हैं। कॉमर्स में जैन और ब्राह्मणों के छात्र ज्यादा हैं। लेकिन जातिगत समीकरण इस बार काम नहीं आया।

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